
उत्तराखंड से जुड़ी एक चर्चित फ्लाइंग कार परियोजना को लेकर अब राजनीतिक और तकनीकी सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री ने इस प्रोजेक्ट को लेकर इसे “गलगोटिया इनोवेशन” बताते हुए इसकी तकनीक और दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कथित तौर पर इसे चीन के खिलौनों जैसा बताया।
वहीं, रवि की ओर से दावा किया गया है कि फ्लाइंग कार में इस्तेमाल होने वाला इंजन तमिलनाडु से लाया गया है। इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से पहले सराहना किए जाने की बात भी रिपोर्ट में सामने आई है।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि फ्लाइंग कार का वास्तविक तकनीकी आधार क्या है और इसके दावों की स्वतंत्र तकनीकी जांच हुई है या नहीं? Ki
अब असली सवाल तकनीक की विश्वसनीयता और आत्मनिर्भरता का है। रवि टम्टा के दावे के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में उन्होंने अपनी तकनीकी समझ और इंटरनेट से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया है, जबकि कुछ उपकरण चीन से लाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में यह जानना जरूरी होगा कि HAPIDA SKYNeX में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख पार्ट्स और तकनीक का कितना हिस्सा स्वदेशी है और इसकी उड़ान क्षमता को प्रमाणित करने के लिए कौन-कौन से तकनीकी परीक्षण किए गए हैं।
उत्तराखंड के लिए यह प्रयोग इसलिए भी अहम है, क्योंकि पहाड़ी राज्य में सड़क संपर्क की मुश्किलों के बीच ऐसी तकनीक भविष्य में आपदा राहत, दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच और परिवहन के नए विकल्प खोल सकती है। हालांकि, इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से पहले सुरक्षा, तकनीकी मानकों और संबंधित सरकारी मंजूरियों की स्पष्ट जांच जरूरी होगी।
**फिलहाल HAPIDA SKYNeX को लेकर उत्सुकता बढ़ी हुई है और अब निगाहें इसके आगे के तकनीकी परीक्षणों और आधिकारिक मूल्यांकन पर हैं।**hai




