
ऋषिकेश: उत्तराखंड की पवित्र भूमि को शर्मसार करने वाले एक मामले में, विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अपनी ही 13 वर्षीय नाबालिग चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को “ताउम्र कैद” (Natural Life Imprisonment) की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस अपराध को रिश्तों का कत्ल और मानवता पर कलंक करार दिया है।
ख़ौफ़ और शोषण के 3 महीने
दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी ने रिश्ते की मर्यादा को तार-तार करते हुए अपनी नाबालिग चचेरी बहन को दरिंदगी का शिकार बनाया। यह सिलसिला केवल एक बार नहीं, बल्कि पिछले 3 महीनों से चल रहा था। आरोपी बच्ची को जान से मारने और परिवार को तबाह करने की धमकी देकर लगातार उसका मानसिक और शारीरिक शोषण कर रहा था।
पॉक्सो कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि ऐसे अपराधी समाज के लिए खतरा हैं। आरोपी ने न केवल कानून तोड़ा, बल्कि एक पवित्र रिश्ते और एक मासूम के भरोसे का भी कत्ल किया।
“उत्तराखंड की पहचान” हमेशा से देवसंस्कृति और उच्च नैतिक मूल्यों के लिए रही है, और ऐसे जघन्य अपराध हमारी पहचान पर एक गहरा धब्बा हैं।
सजा-ए-मौत से कम नहीं: ताउम्र कैद
अदालत ने आरोपी के कृत्य को ‘क्रूरतम’ (Heinous) मानते हुए उसे ताउम्र कैद की सजा सुनाई। इसका मतलब है कि दोषी को अपनी अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। इसके अलावा, कोर्ट ने दोषी पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
समाज के लिए कड़ा सन्देश
”उत्तराखंड की पहचान” न्यूज़ पोर्टल से बात करते हुए, वरिष्ठ कानून विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज में एक कड़ा सन्देश देगा कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में कानून कितना सख्त है, चाहे अपराधी कितना भी करीबी रिश्तेदार क्यों न हो। यह फैसला पीड़ितों को न्याय के प्रति विश्वास दिलाता है और अपराधियों में भय पैदा करता है।
पुलिस की तत्परता और साक्ष्यों की भूमिका
इस मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और मजबूत चार्जशीट ने अहम भूमिका निभाई। मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्यों (Medical & Forensic Evidence) के साथ-साथ पीड़िता और मुख्य गवाहों के बयानों को कोर्ट ने बेहद अहम माना। “उत्तराखंड की पहचान” के माध्यम से हम पुलिस और न्यायपालिका के इस समन्वय की सराहना करते हैं, जिसने एक मासूम को न्याय दिलाया।
सावधानी: नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर न करने के सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, इस ख़बर में पीड़िता या उसके परिवार की पहचान से जुड़ी कोई भी जानकारी शामिल नहीं की गई है। “उत्तराखंड की पहचान” ज़िम्मेदार पत्रकारिता के प्रति वचनबद्ध है।




