
(UKP Exclusive)
धरती के 90 फीट नीचे छिपा कलियुग का सबसे बड़ा रहस्य!
उत्तराखंड की रहस्यमयी गुफा, जहां हर दिन बदल रही है एक अनोखी कहानी
क्या सच में यहीं लिखा है कलियुग के अंत का संकेत? जानिए पाताल भुवनेश्वर का रहस्य
देवभूमि का रहस्य: 90 फीट नीचे मौजूद है वह शिवलिंग, जिसे लेकर है अनोखी मान्यता
धरती के गर्भ में बसा रहस्य… जहां हर साल बढ़ रहा है ‘कलियुग का स्तंभ’
पिथौरागढ़। देवभूमि उत्तराखंड का पाताल भुवनेश्वर सिर्फ एक गुफा नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और रहस्यों का ऐसा संगम है जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित इस गुफा में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 90 फीट नीचे संकरे और खड़ी रास्ते से उतरना पड़ता है। यहां प्राकृतिक रूप से बनी चूना पत्थर की आकृतियों को भगवान शिव, गणेश, शेषनाग और अन्य देवी-देवताओं से जोड़कर देखा जाता है।
इस गुफा की सबसे चर्चित मान्यता ‘कलियुग के स्तंभ’ को लेकर है। कहा जाता है कि यहां मौजूद एक प्राकृतिक शिवलिंग या पत्थर लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, जिस दिन यह गुफा की छत को स्पर्श करेगा, उसी दिन कलियुग का अंत होगा। हालांकि, इस मान्यता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाता है।
मान्यता यह भी है कि इस गुफा का वर्णन स्कंद पुराण सहित कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। गुफा के भीतर प्राकृतिक आकृतियां करोड़ों वर्षों में बनी मानी जाती हैं और इन्हें देखकर श्रद्धालु इसे भगवान शिव का दिव्य धाम मानते हैं। सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।




