
सुरंग हादसों और प्राकृतिक आपदाओं ने उठाए सवाल—क्या विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का समय आ गया है?
उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग हादसे और सिक्किम की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना में हुए हादसे ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय भूगर्भीय रूप से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहां सुरंगों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान जोखिम का वैज्ञानिक आकलन और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है।
लेख में बताया गया है कि वर्ष 2023 में सिलक्यारा सुरंग में 41 मजदूर 17 दिनों तक फंसे रहे थे। हाल की घटनाओं और सिक्किम में सुरंग के भीतर मीथेन गैस विस्फोट जैसी दुर्घटनाओं ने यह चिंता और बढ़ा दी है कि क्या परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि हिमालयी परियोजनाओं में विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, गैस जांच, मजबूत वेंटिलेशन सिस्टम, स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट और आपातकालीन निकासी व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। विकास आवश्यक है, लेकिन श्रमिकों की सुरक्षा और हिमालय के पर्यावरण की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।




